Sunday, 30 August 2020

Class 3 Short Moral Stories in Hindi with Picture and PDF

हिंदी कहानियों की इस मज़ेदार पोस्ट में हम लाये है Moral Short Stories in Hindi For Class 3 और साथ ही आपको यहाँ इसकी Pictures और PDF भी मिलेगी जो बच्चों को सिखाने और बताने में मदद करेगी।


Moral Story In Hindi For Class 3


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Moral Story In Hindi For Class 3


संतोष का फल (संतोष होना जरूरी है)


Moral Story For Class 3

एक बार एक नगर में गरीबी के कारण अकाल पड़ा गया भुखमरी की हालत हो गयी और लोग भूखे मरने लगे। हजारो की संख्या मे लोग मरने लगे,नगर में एक धनी दयालु पुरुष था। उन्होंने घोषणा की सभी छोटे बच्चों को प्रतिदिन एक रोटी दी जाएगी। अगले दिन सुबह सब बच्चे एक बगीचे मे इकट्ठे हुए। उन्हें रोटियाँ बाँटी गयी।

सब भूखे थे इसलिए एक-दूसरे को धक्का देकर बड़ी रोटी पाने का प्रयास कर रहे थे। उसी दौरान एक छोटी लड़की ओर चुपचाप कोने मे खड़ी थी और सबसे अन्त में आगे बढ़ी। अब तो टोकरे में अन्तिम रोटी बची थी और वो बहुत ही छोटी थी।लेकिन उस लडकी ने उसे बड़ी ही प्रसन्नता से ले लिया और वह घर चली गयी।

दूसरे दिन फिर रोटियाँ बाँटी गयीं। आज भी उस लड़की को सबसे छोटी रोटी मिली और वो घर चली गयी तो,लड़की ने जब घर लौट कर जब रोटी तोड़ी तो रोटी में से सोने की एक मुहर निकली।
ये देख उसकी माताजी बोली :- ये मुहर धनी को दे आओ। लड़की दौड़ी -दौड़ी धनी के पास गयी।

धनी ने लडकी को देखकर पूछा- तुम यहाँ क्यों आयी हो?

लड़की बोली - यह सोने की मुहर मेरी रोटी मे से निकली है। इसलिए मैं आपको ये देने आयी हूँ। शायद आटे मे गिर गयी होगी।

यह देख धनी की आँखो मे आँसू आ गये वो बहुत खुश हुआ। धनी ने उस लड़की को अपनी धर्मपुत्री बना लिया और उसकी माता के लिये भी रहने की व्यवस्था की और अर्थिक सहायता भी प्रदान।जब लड़की बड़ी हुई तो धनी ने उसे उत्तराधिकारिणी बना दिया, नगर अब वो संभालने लगी।

शिक्षा (Moral Of Story) :


हमे हर चीज मे सन्तोष करना चाहिए, हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए उनके अच्छे फल कभी ना कभी जरूर मिलेंगे। जितना मिले उसमे खुश रहना चाहिए भगवान जो भी करेंगे सब अच्छा ही करेगे।इन्सान की चाहत कभी भी खत्म नही होती हैं। रोड मे रहने वाला एक गरीब एक झोपड़ी मंगता है फ़िर एक अच्छा मकान और एक दिन उसका लोभ से भरा दिमाग राजमहल की कामना करता है।


तीसरी बकरी की कहानी (Third Goat Story)


Moral Story In Hindi

चिंटू और पिंटू दोनो बड़े शरारती बच्चे थे, दोनों पाँचवी  कक्षा मे पढ़ते थे और एक साथ ही स्कूल आया-जाया करते थे।
एक दिन स्कूल जाते वक्त चिंटू ने पिंटू से कहा, दोस्त, मेरे दिमाग में एक आईडिया है?

पिंटू : बता दोस्त क्या आईडिया है?

चिंटू : वो देख सामने 3 बकरियां चर रही हैं।

पिंटू : तो इनसे हमे क्या लेना-देना है?यार 

चिंटू : हम आज सबसे अंत में स्कूल से निकलेंगे और  इन बकरियों को पकड़ कर स्कूल में छोड़ देंगे, कल जब स्कूल खुलेगा तब सभी इन्हें खोजने में अपना समय खराब करेगे और हमें पढाई नहीं करनी पड़ेगी…

पिंटू : लेकिन यार ये बकरियां इतनी बड़ी है इनको खोजना कोई कठिन काम थोड़े ही है।

चिंटू : हँसने लगा हाहाहा…यही तो बात है, वे बकरियां आसानी से नहीं ढूंढ पायेंगे, बस तुम देखते जाओ मैं क्या करता हूँ!”

जैसे ही छुट्टी हुई सब अपने घर चले गये लेकिन वो दोनो पढ़ायी के बहाने से अपने क्लास में बैठे रहे और थोड़ी देर बाद तीनो बकरियों को पकड़ कर क्लास के अन्दर ले आये।
इसके बाद चिंटू ने बकरियों की पीठ पर एक काले रंग का गोला बना दिया।चीन्टू बोला, “अब मैं इन बकरियों पर नंबर लिख देता हूँ और उसने सफेद रंग से नंबर लिखने शुरू किये-

पहली बकरी पर नंबर 1

दूसरी पर नंबर 2

और तीसरी पर नंबर 4

पिंटू : ये क्या? तुने तीसरी बकरी पर नंबर 4 क्यों लिख दिया।

चिंटू : हंसते हुए बोला, अरे यही तो मेरा आईडिया है, अब कल देखियो सब इस तीसरे नंबर की बकरी को ढूँढगे और सारा दिन निकल जाएगा…और फ़िर भी वो किसी को मि  नहीं मिलेगी…

अगली सुबह दोनों समय से पहले ही स्कूल पहुँच गए। जैसी सब लोग आए तो स्कूल मे शोर मच गया अन्दर बकरिया है। कोई चिल्ला रहा था, 4 बकरियां हैं, पहले, दुसरे और चौथे नंबर की बकरियां तो आसानी से मिल गयी बस तीसरे नंबर वाली को ढूँढना बाकी है।”

इसके लिये स्कूल का सारा स्टाफ लग गया नंबर की बकरी सभी क्लास में टीचर गए अच्छे से तालाशी ली। इस काम मे बडे छात्रो को भी लगाया गया छतों पर भी बकरी को ढूंढा गया।
तीसरी बकरी ढूँढने के बहुत प्रयास किये गये पर बकरी कैसे मिलती जब वो है नही। सब परेशान हो गये लेकिन चिंटू पिंटू दोनो दूर खड़े सब देख रहे थे। दोस्तो आपको भी हँसी आ रही है ना 😛😛😂😂😂

शिक्षा (Moral Of Story) :


तीसरी बकरी वो चीज हैं जिसको हम खोजते हैं लेकिन असल मे देखा जाए तो वो होती ही नही हैं। बच्चे चाहते हैं एग्ज़ाम मे सिर्फ आसान सवाल आए।
बड़े चाहते हैं उनको ऐसी नौकरी या बिजनेस मिले हैं, जिसमे हमेशा सबकुछ एकदम अच्छे से चलता रहे कभी नुकसान ना हो। जो असल मे सम्भव नही हैं।हम जीवन मे बस सुख चाहते हैं कोई दुख दर्द नही जो असम्भव है।अगर सुख के बादल है तो दुख के भी आएंगे।


भालू और मतलबी दोस्त (सच्चा मित्र कौन हैं)

Moral Story In Hindi

जैसा की आप ने ऊपर की कहानी मे पढ़ा कि हमारे जीवन मे दुख और सुख दोनो आते हैं। तो दुख मे भी तो हमारे साथ कोई होना चाहिए, एक सच्चे मित्र की पहचान आपको इस पहेली के माध्यम से मिलेगी।

एक बार दो दोस्त थे ढोलू और भोलू दोनो पक्के दोस्त थे। भोलू जहां दुबला-पतला था, ढोलू गोल-मटोल मोटा सा था दोनों एक-दूसरे पर जान देने का दम रखते थे, ये देख आस-पास के सभी लोग हँसते। एक बार उन्हें किसी अन्य गांव में रहने वाले मित्र ने निमंत्रण दिया उसने उन्हें अपनी बहन के विवाह के अवसर पर बुलाया था।

उनके मित्र का गांव ज्यादा दूर नहीं था लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए उन्हे एक जंगल से होकर गुजरना पड़ता था और उस जंगल में जंगली जानवरों की भरमार थी।

दोनों जंगल की तरफ चल दिए कुछ दूरी के बाद उन्हें सामने से एक भालू आता दिखा। भालू को देखकर दोनों  थर-थर कांपने लगे। भालू और नजदीक आता गया तभी भोलू दुबला-पतला होने के कारण तेजी से दौड़कर पास के एक पेड़ पर जा चढ़ा गया लेकिन ढोलू मोटा होने के कारण दौड़ ना सका। उधर भालू भी उसके निकट आ चुका था, फिर भी ढोलू ने साहस नहीं खोया। 

उसने सुना था कि भालू मृत शरीर को नहीं खाते। वह तुरंत जमीन पर लेट गया और सांसे रोक ली। ऐसा प्रतीत किया कि मानो शरीर में प्राण हैं ही नहीं। भालू घुरघुराता हुआ ढोलू के पास आया, उसके चेहरे व शरीर को सूंघा और उसे मृत समझकर आगे बढ़ गया।
जब भालू काफी दूर निकल गया तो भोलू पेड़ से उतरकर ढोलू के पास आया और बोला : दोस्त, मैंने देखा था…भालू तुमसे कुछ कह रहा था। क्या कहा उसने ?’

ढोलू ने गुस्से में जवाब दिया : मुझे दोस्त कहकर मत बुलाओ…और ऐसा ही कुछ भालू ने भी मुझसे कहा। उसने कहा, भोलू पर विश्वास न करना, वह तुम्हारा मित्र नहीं है।’’

ये बात सुनकर भोलू शर्मिन्दा हो गया। उसे इस बात का आभास हो गया था कि उससे कितनी भारी भूल हो गई थी। इसके बाद से उनकी दोस्ती भी हमेशा के लिये समाप्त हो गई।

शिक्षा (Moral Of Story) :


इस कहानी से हमे यह सिख मिलती है की, मुसीबत मे जो दोस्त का साथ छोड़ दे वो सच्चा मित्र कैसे होता है।
आपका सच्चा मित्र वही होता है जो संकट के समय काम आए, आपके दुख मे भी काम आए। ये नही की सिर्फ सुख और अच्छे समय मे ही आपका साथ दे।ना ही मित्रता पैसो से की जाती हैं, कि इसके पास गाड़ी हैं अच्छे पैसे हैं। एक सच्चा मित्र हो तो जिन्दगी मे दुखो का पता ही नही चलता

लालच बुरी बला है 😇😇


एक नगर में हरिया नाम का एक ब्राह्मण रहता करता था। उसकी खेती साधारण ही थी, इस कारण समय वह खाली ही रहता था। एक बार गर्मियों में वह इसी प्रकार अपने खेत पर वृक्ष की शीतल छाया में लेटा हुआ था। सोए-सोए उसने अपने समीप ही साँप का एक बिल देखा, उस पर साँप फन फैलाए बैठा था।
यह देखकर वह ब्राह्मण विचार करने लगा कि हो-न-हो, यही मेरे क्षेत्र का देवता है। मैंने कभी इसकी पूजा नहीं की। अतः मैं आज  इसकी पूजा करूंगा। यह विचार मन में आते ही वह उठा और कहीं से जाकर दूध मांग लाया।

उसने मिट्टी के एक बरतन दूध रखा और बिल के पास जाकर बोला : “हे क्षेत्रपाल! आज तक मुझे आपके विषय में मालूम नहीं था, इसलिए मैं किसी प्रकार की पूजा-अर्चना नहीं कर पाया। आप मेरे इस अपराध को क्षमा कर मुझ पर कृपा कीजिए और मुझे धन-धान्य से समृद्ध कीजिए।”

इस प्रकार प्रार्थना करके उसने उस दूध को वहीं पर रख दिया और फिर अपने घर को लौट गया। अगले दिन सुबह  जब वह अपने खेत पर आया तो सर्वप्रथम उसी स्थान पर गया। वहां उसने देखा कि जिस बरतन में उसने दूध रखा था उसमें एक स्वर्णमुद्रा रखी हुई है।

उसने उस मुद्रा को उठाकर रख लिया। उस दिन भी उसने उसी तरह साँप की पूजा की और उसके लिए दूध रखकर चला गया। अगले दिन फ़िर सुबह उसको फिर एक स्वर्णमुद्रा मिली। इस प्रकार अब रोज वह पूजा करता और अगले दिन उसको एक स्वर्णमुद्रा मिल जाया करती थी।

कुछ दिनों बाद उसको किसी कार्य से अन्य नगर में जाना पड़़ा। उसने अपने पुत्र को उस स्थान पर दूध रखने का निर्देश दिया। पिता की बात मानते हुए उस दिन उसका पुत्र गया और वहां दूध रख आया। दूसरे दिन जब वह पुनः दूध रखने के लिए गया तो देखा कि वहां स्वर्णमुद्रा रखी हुई है।

उसने उस मुद्रा को उठा लिया और वह मन ही मन सोचने लगा कि निश्चित ही इस बिल के अंदर स्वर्णमुद्राओं का भण्डार है। मन में यह विचार आते ही उसने निश्चय किया कि बिल को खोदकर सारी मुद्राएं ले ली जाएं। लेकिन उसको साँप का भय था। किन्तु जब दूध पीने के लिए सर्प बाहर निकला तो उसने उसके सिर पर लाठी का प्रहार किया।

इससे साँप तो मरा नहीं और इस प्रकार से क्रुद्ध होकर उसने ब्राह्मण-पुत्र को अपने विषभरे दांतों से काटा कि उसकी तत्काल मृत्यु हो गई। इसके बाद उसके सम्बधियों ने उस लड़के को वहीं उसी खेत पर जला दिया।


शिक्षा (Moral Of Story) :


बच्चो लालच एक बुरी बला है हमे किसी भी चीज का लालच नही करना चाहिए, जितना मिले उतने मे सन्तोष करना चाहिए। लालच का फल कभी भी मीठा नहीं होता है। इसमे अंत मे हमारा ही नुकसान होता हैं, अगर कोई भी व्यक्ति हमे किसी चीज का लालच दे तो हमे उसकी बातो मे नही आना चाहिए।

Final Words :

दोस्तो आपको हमारी क्लास 3 के लिये ये Moral story in hindi कैसी लगी हमे कमेंट करके जरूर बताएँ। हमारा उदेश्य इस पोस्ट के माध्यम से आपको पुरानी कहानियों से क्या शिक्षा मिलती है उनका क्या moral हैं वो आपको प्रदान करना है।

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