Saturday, 5 September 2020

Class 5 Short Moral Stories In Hindi With Pictures And Pdf, नैतिक कहानियाँ

नमस्कार दोस्तो मजेदार हिन्दी कहानियों की इस पोस्ट मे हम  Moral Stories in hindi for class 5 लेकर आयें हैं। यहाँ आपको इसकी Pictures और Pdf भी मिलेगी, जो बच्चो को सिखाने और बताने मे मदद करेंगी। 

Moral Stories In Hindi For Class 5


आजकल के दौर मे बच्चो पर पढाई का काफी प्रेशर हो गया है,परेंट्स और  टीचर शुरुआती कक्षा से उन्हे गणित और विज्ञान पढ़ाना शुरु कर देते हैं। जबकी इस समय मे उनको moral values बताना भी जरुरी हैं। नैतिक शिक्षा प्रदान करने का सबसे अच्छा माध्य्म कहानियाँ हैं। इससे बच्चे बौर भी नही होंगे और उनको इन कहानियों के माध्यम से सीख मिलेगी।अगर आप अपने बच्चो को विज्ञान,गणित के अलावा जिन्दगी की कुछ moral values सिखाना चाहते हैं,तो इस पोस्ट मे आपको Moral Stories in hindi For Class 5 पढ़ने को मिलेगी। इससे बच्चो को मजा भी आता हैं और उनको शिक्षा भी मिलती हैं। 


शरारती बंदर की कहानी


Moral Stories in hindi for class 5

एक बार की बात हैं शहर से कुछ ही दूरी पर एक मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा था। मंदिर में लकड़ी का काम बहुत था इसलिए लकड़ी चीरने वाले बहुत से मजदूर काम पर लगे हुए थे। यहां-वहां लकड़ी के लठ्टे पड़े हुए थे और लठ्टे व शहतीर चीरने का काम चल रहा था। सारे मजदूरों को दोपहर का भोजन करने के लिए शहर जाना पड़ता था, इसलिए दोपहर के समय एक घंटे तक वहां कोई नहीं होता था। 


एक दिन खाने का समय हुआ तो सारे मजदूर काम छोड़कर चल दिए। एक लठ्टा आधा चिरा रह गया था। आधे चिरे लठ्टे में मजदूर लकड़ी का कीला फंसाकर चले गए। ऐसा करने से दोबारा आरी घुसाने में आसानी रहती हैं।


तभी वहां बंदरों का एक दल उछलता-कूदता आया। उनमें एक शरारती बंदर भी था, जो बिना मतलब चीजों से छेडछाड करता रहता था। पंगे लेना उसकी आदत थी। बंदरों के सरदार ने सबको वहां पड़ी चीजों से छेडछाड न करने का आदेश दिया। सारे बंदर पेड़ों की ओर चल दिए, पर वह शैतान बंदर सबकी नजर बचाकर पीछे रह गया और लगा अडंगेबाजी करने।


उसकी नजर अधचिरे लठ्टे पर पड़ी। बस, वह उसी पर पिल पड़ा और बीच में अडाए गए कीले को देखने लगा। फिर उसने पास पड़ी आरी को देखा। उसे उठाकर लकड़ी पर रगड़ने लगा। उससे किर्रर्र-किर्रर्र की आवाज निकलने लगी तो उसने गुस्से से आरी पटक दी। उन बंदरो की भाषा में किर्रर्र-किर्रर्र का अर्थ ‘निखट्टू’ था। वह दोबारा लठ्टे के बीच फंसे कीले को देखने लगा।


उसके दिमाग में कौतुहल होने लगा कि इस कीले को लठ्टे के बीच में से निकाल दिया जाए तो क्या होगा? अब वह कीले को पकड़कर उसे बाहर निकालने के लिए जोर आजमाईश करने लगा। लठ्टे के बीच फंसाया गया कीला तो दो पाटों के बीच बहुत मजबूती से जकडा गया होता हैं, क्योंकि लठ्टे के दो पाट बहुत मजबूत स्प्रिंग वाले क्लिप की तरह उसे दबाए रहते हैं।


बंदर खूब जोर लगाकर उसे हिलाने की कोशिश करने लगा। कीला जोर लगाने पर हिलने व खिसकने लगा तो बंदर अपनी शक्ति पर खुश हो गया। वह और जोर से खौं-खौं करता कीला सरकाने लगा। इस धींगामुश्ती के बीच बंदर की पूंछ दो पाटों के बीच आ गई थी, जिसका उसे पता ही नहीं लगा।


उसने उत्साहित होकर एक जोरदार झटका मारा और जैसे ही कीला बाहर खिंचा, लठ्टे के दो चिरे भाग फटाक से क्लिप की तरह जुड गए और बीच में फंस गई बंदर की पूंछ। बंदर चिल्ला उठा। तभी मजदूर वहां लौटे। उन्हें देखते ही बंदर ने भागने के लिए जोर लगाया तो उसकी पूंछ टूट गई। वह चीखता हुआ टूटी पूंछ लेकर भागा।


सीख (Moral Of Story) :


बच्चों इस कहानी के माध्यम से हमे इस शिक्षा मिलती हैं की बिना सोचे-समझे हमे कोई भी काम नही करना चाहिए नही तो उस काम का गलत परिणाम होता है। किसी भी काम को करने से पहले हमे उसके बारे मे सोचना चाहिए अपने दोस्तो व परिवार के साथ चर्चा करनी चाहिए। इससे उस काम के बारे मे आपको और जानकारी मिलेगी।


Moral Stories In Hindi For Class 3


एकता की ताकत 


Moral Stories in hindi for class 5


एक वन में बहुत बडा अजगर रहता था। वह बहुत अभिमानी और अत्यंत क्रूर था। जब वह अपने बिल से निकलता तो सब जीव उससे डरकर भाग खड़े होते। उसका मुंह इतना विकराल था कि खरगोश तक को निगल जाता था। 


एक बार अजगर शिकार की तलाश में घूम रहा था। सारे जीव तो उसे बिल से निकलते देखकर ही भाग चुके थे। उसे कुछ न मिला तो वह क्रोधित होकर फुफकारने लगा और इधर-उधर खाक छानने लगा। वहीं निकट में एक हिरणी अपने नवजात शिशु को पत्तियों के ढेर के नीचे छिपाकर स्वयं भोजन की तलाश में दूर निकल गई थी।


अजगर की फुफकार से सूखी पत्तियां उड़़ने लगी और हिरणी का बच्चा नजर आने लगा। अजगर की नजर उस पर पड़ी हिरणी का बच्चा उस भयानक जीव को देखकर इतना डर गया कि उसके मुंह से चीख तक न निकल पाई। अजगर ने देखते-ही-देखते नवजात हिरण के बच्चे को निगल लिया। तब तक हिरणी भी लौट आई थी, पर वह क्या करती? आंखों में आंसू भर जड़ होकर दूर से अपने बच्चे को काल का ग्रास बनते देखती रही।


हिरणी के शोक का ठिकाना न रहा। उसने किसी-न किसी तरह अजगर से बदला लेने की ठान ली। हिरणी की एक नेवले से दोस्ती थी शोक में डूबी हिरणी अपने मित्र नेवले के पास गई और रो-रोकर उसे अपनी दुखभरी कथा सुनाई। नेवले को भी बहुत दुख हुआ। वह दुख-भरे स्वर में बोला “मित्र, मेरे बस में होता तो मैं उस नीच अजगर के सौ टुकडे कर डालता। पर क्या करें, वह छोटा-मोटा सांप नहीं हैं, जिसे मैं काट सकूं वह तो एक अजगर हैं। अपनी पूंछ की फटकार से ही मुझे अधमरा कर देगा। लेकिन यहां पास में ही चीटिंयों की एक बांबी हैं। वहां की रानी मेरी मित्र हैं। उससे सहायता मांगनी चाहिए।


हिरणी निराश स्वर में विलाप किया “पर जब तुम्हारे जितना बडा जीव उस अजगर का कुछ बिगाडने में समर्थ नहीं हैं तो वह छोटी-सी चींटी क्या कर लेगी?”


नेवले ने कहा : ऐसा मत सोचो। उसके पास चींटियों की बहुत बडी सेना हैं। संगठन में बडी शक्ति होती हैं।

हिरणी को कुछ आशा की किरण नजर आई। नेवला हिरणी को लेकर चींटी रानी के पास गया और उसे सारी कहानी सुनाई। चींटी रानी ने सोच-विचारकर कहा “हम तुम्हारी सहायता करेंगे। 


हमारी बांबी के पास एक संकरीला नुकीले पत्थरों भरा रास्ता हैं। तुम किसी तरह उस अजगर को उस रास्ते से आने पर मजबूर करो। बाकी काम मेरी सेना पर छोड़ दो। नेवले को अपनी मित्र चींटी रानी पर पूरा विश्वास था इसलिए वह अपनी जान जोखिम में डालने पर तैयार हो गया। 


दूसरे दिन नेवला जाकर सांप के बिल के पास अपनी बोली बोलने लगा। अपने शत्रु की बोली सुनते ही अजगर क्रोध में भरकर अपने बिल से बाहर आया। नेवला उसी संकरे रास्ते वाली दिशा में दौड़ा। अजगर ने पीछा किया। अजगर रुकता तो नेवला मुडकर फुफकारता और अजगर को गुस्सा दिलाकर फिर पीछा करने पर मजबूर करता। इसी प्रकार नेवले ने उसे संकरीले रास्ते से गुजरने पर मजबूर कर दिया। नुकीले पत्थरों से उसका शरीर छीलने लगा। जब तक अजगर उस रास्ते से बाहर आया तब तक उसका काफी शरीर छिल गया था और जगह-जगह से खून टपक रहा था।


उसी समय चींटियों की सेना ने उस पर हमला कर दिया। चींटियां उसके शरीर पर चढकर छिले स्थानों के नंगे मांस को काटने लगीं। अजगर तडप उठा। अपना शरीर पटकने लगा जिससे और मांस छिलने लगा और चींटियों को आक्रमण के लिए नए-नए स्थान मिलने लगे। अजगर चींटियों का क्या बिगाडता? वे हजारों की गिनती में उस पर टूट पड़ रही थी। कुछ ही देर में क्रूर अजगर ने तडप-तडपकर दम तोड़ दिया।


सीख (Moral Of Story) :


बच्चो इस कहानी के माध्यम से हमे यह शिक्षा मिलती हैं की एकता मे कितना बल होता हैं अगर किसी काम को सभी साथ मिलकर करते हैं तो बहुत जल्दी पूरा हो जाता हैं, एकता मे जो बल है वो अकेले मे नही। अगर आपस मे एकता हो तो बडे-बडों को धूल चटा देती हैं। इसलिए हमे सबसे मिलकर रहना चाहिए कभी भी झगड़ा नही करना चाहिए।


घंटीधारी ऊंट और शेर


Moral Stories in hindi for class 5


एक बार की बात हैं कि एक गांव में एक जुलाहा रहता था। वह बहुत गरीब था। उसकी शादी बचपन में ही हो गई थी। बीवी आने के बाद घर का खर्चा बढना था। यही चिन्ता उसे खाए जाती। फिर गांव में अकाल भी पड़ा। लोग कंगाल हो गए। जुलाहे की आय एकदम खत्म हो गई। उसके पास शहर जाने के सिवा और कोई चारा न रहा।


शहर में उसने कुछ महीने छोटे-मोटे काम किए। थोडा-सा पैसा अंटी में आ गया और गांव से खबर आने पर कि अकाल समाप्त हो गया हैं, वह गांव की ओर चल पड़ा। रास्ते में उसे एक जगह सड़क किनारे एक ऊंटनी नजर आई।ऊटंनी बीमार नजर आ रही थी और वह गर्भवती थी। उसे ऊंटनी पर दया आ गई। वह उसे अपने साथ अपने घर ले आया।


घर में ऊंटनी को ठीक चारा व घास मिलने लगी तो वह पूरी तरह स्वस्थ हो गई और समय आने पर उसने एक स्वस्थ ऊंट बच्चे को जन्म दिया। ऊंट बच्चा उसके लिए बहुत भाग्यशाली साबित हुआ। कुछ दिनों बाद ही एक कलाकार गांव के जीवन पर चित्र बनाने उसी गांव में आया। पेंटिंग के ब्रुश बनाने के लिए वह जुलाहे के घर आकर ऊंट के बच्चे की दुम के बाल ले जाता। लगभग दो सप्ताह गांव में रहने के बाद चित्र बनाकर कलाकार चला गया। इधर ऊंटनी खूब दूध देने लगी तो जुलाहा उसे बेचने लगा। एक दिन वहा कलाकार गांव लौटा और जुलाहे को काफी सारे पैसे दे गया, क्योंकि कलाकार ने उन चित्रों से बहुत पुरस्कार जीते थे और उसके चित्र अच्छी कीमतों में बिके थे। 


जुलाहा उस ऊंट बच्चे को अपना भाग्य का सितारा मानने लगा। कलाकार से मिली राशी के कुछ पैसों से उसने ऊंट के गले के लिए सुंदर-सी घंटी खरीदी और पहना दी। इस प्रकार जुलाहे के दिन फिर गए। वह अपनी दुल्हन को भी एक दिन गौना करके ले आया। ऊंटों के जीवन में आने से जुलाहे के जीवन में जो सुख आया, उससे जुलाहे के दिल में इच्छा हुई कि जुलाहे का धंधा छोड़ क्यों न वह ऊंटों का व्यापारी ही बन जाए। उसकी पत्नी भी उससे पूरी तरह सहमत हुई। अब तक वह भी गर्भवती हो गई थी और अपने सुख के लिए ऊंटनी व ऊंट बच्चे की आभारी थी।


जुलाहे ने कुछ ऊंट खरीद लिए। उसका ऊंटों का व्यापार चल निकला।अब उस जुलाहे के पास ऊंटों की एक बडी टोली हर समय रहती। उन्हें चरने के लिए दिन को छोड़ दिया जाता। ऊंट बच्चा जो अब जवान हो चुका था उनके साथ घंटी बजाता जाता। एक दिन घंटीधारी की तरह ही के एक युवा ऊंट ने उससे कहा “भैया! तुम हमसे दूर-दूर क्यों रहते हो?”


घंटीधारी गर्व से बोला : तुम एक साधारण ऊंट हो। मैं घंटीधारी मालिक का दुलारा हूं। मैं अपने से ओछे ऊंटों में शामिल होकर अपना मान नहीं खोना चाहता।


उसी क्षेत्र में वन में एक शेर रहता था। शेर एक ऊंचे पत्थर पर चढकर ऊंटों को देखता रहता था। उसे एक ऊंट और ऊंटों से अलग-थलग रहता नजर आया। जब शेर किसी जानवर के झुंड पर प्रहार करता हैं तो किसी अलग-थलग पड़े को ही चुनता हैं। घंटीधारी की आवाज के कारण यह काम भी सरल हो गया था। बिना आंखों देखे वह घंटी की आवाज पर घात लगा सकता था।


दूसरे दिन जब ऊंटों का दल चरकर लौट रहा था तब घंटीधारी बाकी ऊंटों से बीस कदम पीछे चल रहा था। शेर तो घात लगाए बैठा ही था। घंटी की आवाज को निशाना बनाकर वह दौड़ा और उसे मारकर जंगल में खींच ले गया। ऐसे घंटीधारी के अहंकार ने उसके जीवन की घंटी बजा दी।



सीख (Moral Of Story) :


बच्चो इस कहानी से हमे बहुत बड़ी शिक्षा मिलती हैं जो जिन्दगी भर काम आएगी की हमे कभी भी अपने आप को ही सबसे श्रेष्ठ नही समझना चाहिए। ना ही कभी किसी चीज का घमंड करना चाहिए, क्योंकि जो व्यक्ति अहंकार और घमंड करता है उसका बहुत जल्दी विनाश होता है। जींदगी मे कभी भी किसी भी चीज का घमंड नही करना चाहिए, जितनी हो सके सबकी मदद करनी चाहिए।


Moral Stories In Hindi For Class 4


ईमानदारी का फल (लालच बुरी बला है)


एक बार की बात हैं एक गरीब लकडहारा था गोपाल वह रोज जंगल में जाता और लकडिया काटता और फ़िर शाम को उन्हें बाजार में बेच देता था। लकड़ियों को बेचने से जो पैसे मिलते उन्ही से उसके परिवार का गुजारा होता था।


एक दिन गोपाल लकडी की तलाश मे जंगल में दूर निकल गया। अंत मे वह एक नदी के किनारे पहुँचा जहाँ उसकी नजर एक बड़े पेड़ पर पड़ी। उसने सोचा की इससे आज मुझे बहुत सारी लकड़ियाँ मिल जाएँगी। इसके लिये अपनी कुल्हाड़ी लेकर वह उस पेड़ पर चढ़ गया। जैसी उसने डाल काटनी शुरु की, की अचानक उसके कुल्हाड़ी उसके हाथ से फिसल गई और नदी में जा गिरी। गोपाल जटपट पेड़ से नीचे उतरा और नदी में अपनी कुल्हाड़ी ढूंढने लगा। उसने काफी कोशिश की, मगर कुल्हाड़ी उसके हाथ न लगी। उदास होकर वह पेड़ के नीचे जाकर बैठ गया।


इतने में वहाँ एक देवदूत प्रकट हुए। उन्होने गोपाल से पूछा तुम इतने उदास क्यों हो। गोपाल ने देवदूत को जवाब दिया: वो मेरी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई है और मिल भी नही रही।


देवदूत ने धीरज बंधाते हुए कहा : तुम घबराओ मत, मै तुम्हारी कुल्हाड़ी निकल दूंगा।


यह कहकर देवदूत ने नदी में डूबकी लगाई। वह सोने की कुल्हाड़ी लेकर बहार निकला। उसने गोपाल से पूछा “क्या यही तुम्हारी कुल्हाड़ी है।


गोपाल ने कहा, "नहीं महाराज, यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है  फिर दूसरी बार डूबकी लगाकर देवदूत ने चांदी की कुल्हाड़ी निकाली।

तब भी गोपाल ने इनकार करते हुए कहा, “नहीं, यह भी मेरी कुल्हाड़ी नहीं है। 


देवदूत ने एक बार फिर से डुबकी लगाई और अबकी बार उन्होने लोहे की कुल्हाड़ी निकाली। लोहे की कुल्हाड़ी को देखते ही गोपाल ख़ुशी से चिल्ला उठा, “ हाँ महाराज, यही मेरी कुल्हाड़ी है।गोपाल की इमानदारी पर देवदूत बहुत खुश हुआ। लोहे की कुल्हाड़ी के साथ-साथ सोने की और चांदी की कुल्हाड़िया भी देवदूत ने गोपाल को इनाम में दे दी । गोपाल ने देवदूत का बड़ा आभार मना।


सीख (Moral Of Story) :


बच्चो इस कहानी से हमे बहुत बड़ी शिक्षा मिलती हैं की हमे कभी भी लालच नही करना चाहिए ,हमेशा अपनी इमानदारी का परिचय देना चाहिए क्योंकि ईमानदारी एक अच्छा गुण है और इसका फल हमेशा मीठा होता है। अगर हम किसी के साथ बेमानी करते है तो इसका बुरा परिणाम होता हैं इसलिए हमे सदा ईमानदार रहना चाहिए कभी भी लालच नही करना चाहिए।



Final Words :


तो प्रिये पाठको आशा करते हैं आपको ये कहानियाँ पसंद आई होगी। आपको सबसे मजेदार कहानी कौन-सी लगी हमे कमेंट् करके जरुर बताएँ। वैसे तो यह कहानियाँ बच्चो के लिये है लेकिन इन कहानियों मे जो सीख है वो सभी के लिये आवश्क हैं। हमारा उद्देश्य इस पोस्ट के माध्यम से इन कहानियों से क्या शिक्षा मिलती हैं आपको बताना है। मिलते हैं ऐसी ही मजेदार पोस्ट के साथ।


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